Rajasthan Gogaji Fair gogamedi rajasthan gogaji temple

Rajasthan Gogaji Fair gogamedi rajasthan gogaji temple Gogamedi is located in nohar dist hanumangarh Rajasthan Temple of Shri Gogaji History temple of Goga Ji Maharaja

Gogamedi Fair 2018 – August (Friday) to August (Sunday)

Rajasthan Gogaji Fair gogamedi rajasthan gogaji templeIndia is a land of celebrations. Rarely will you come across lively people across the globe that worship animals and sing hymns in their praise. However, India is an exception and you will find such people in Gogamedi. Gogamedi is located in district of Hanumangarh and is located some 395 km from the capital city of Jaipur in Rajasthan.

Temple Profile: Mandir Shri Goga Ji
Location: At gram Gogamedi in Nohar Tehsil of Hanumangarh District God Worshipped: Shri Gogaji
District: Hanumangarh Road Distance from Jaipur: 350 Kms.
Built in the year: 1911 Nearest Airport: Jaipur (350 Kms)
By Maharaja Shri Ganga Singh Ji Nearest Rly. Station: Gogamedi (2 Kms)

Gogamedi fair is celebrated in honor of Serpent God and the celebrations begin on Goga Navmi. The festival is usually held in the month of August – September every year. The festivities are dedicated to Goga Ji Maharaja and are observed with full religious devotion.

भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की नवमी गोगा नवमी के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन श्रीजाहरवीर गोगाजी का जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस अवसर पर बाबा जाहरवीर गोगाजी के भक्तगण अपने घरों में इष्टदेव की थाड़ी(थान-वेदी) बनाकर अखण्ड ज्योति जागरण कराते हैं तथा गोगादेवजी की शौर्य गाथा एवं जन्म कथा सुनते हैं। इस प्रथा को जाहरवीर का जोत कथा जागरण कहते हैं। इस दिन कहीं मेले लगते हैं तो कहीं भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। ऐसी मान्यता है कि श्रीगोगादेव भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

कौन थे श्रीगोगादेव महाराज

किवदंती के अनुसार श्रीगोगादेव का जन्म नाथ संप्रदाय के योगी गोरक्षनाथ के आशीर्वाद से हुआ था। योगी गोरक्षनाथ ने ही आपकी माता बाछल को प्रसाद रूप में अभिमंत्रित गुग्गल दिया था। जिसके प्रभाव से महारानी बाछल से जाहरवीर (श्रीगोगादेव महाराज), पुरोहितानी से नरसिंह पाण्डे, दासी से मज्जूवीर, महतरानी से रत्नावीर तथा बन्ध्या घोड़ी से नीलाश्ववीर का जन्म हुआ। इन सभी ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए विधर्मी राजाओं से घोर युद्ध किया जिसमें श्रीगोगादेवजी व नीलाश्व को छोड़कर अन्य वीरगति को प्राप्त हुए। अंत में गुरु गोरक्षनाथ के योग, मंत्र व प्रेरणा से श्रीजाहरवीर गोगाजी ने नीले घोड़े सहित धरती में जीवित समाधि ली।

मध्यकालीन महापुरूष गोगाजी हिंदू, मुस्लिम, सिख संप्रदायों की सहानुभूति व श्रद्घा अर्जित कर एक धर्मनिरपेक्ष लोकदेवता के नाम से पीर के रूप में प्रसिद्व हुए। गोगाजी का जन्म राजस्थान के ददरेवा (चुरू) चौहान वशं के राजपूत शासक जैबर की पत्नी बाछल के गर्भ से गुरू गोरखनाथ के वरदान से भादो शुदी नवमी को हुआ था। इनके जन्म की भी विचित्र कहानी है। एक किवदंती के अनुसार गोगाजी का माँ बाछल देवी निःसंतान थी। संतान प्राप्ति के सभी यत्न करने के बाद भी संतान सुख नही मिला। गुरू गोरखनाथ गोगामेडी के टीले पर तपस्या कर रहे थे। बाछल देवी उनकी शरण मे गईं तथा गुरू गोरखनाथ ने उन्हे पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया और कहा कि वे अपनी तपस्या पूरी होने पर उन्हें ददरेवा आकर प्रसाद देंगे जिसे ग्रहण करने पर उन्हे संतान की प्राप्ति होगी। तपस्या पूरी होने पर गुरू गोरखनाथ बाछल देवी के महल पहुंचे। उन दिनों बाछल देवी की सगी बहन काछल देवी अपनी बहन के पास आई हुई थी। गुरू गोरखनाथ से काछल देवी ने प्रसाद ग्रहण कर लिया और दो दाने अनभिज्ञता से प्रसाद के रूप में खा गई। काछल देवी गर्भवती हो गई। बाछल देवी को जब यह पता चला तो वह पुनः गोरखनाथ की शरण मे गई। गुरू बोले, देवी ! मेरा आशीर्वाद खाली नहीं जायेगा तुम्हे पुत्ररत्न की प्राप्ति अवश्य होगी। गुरू गोरखनाथ ने चमत्कार से एक गुगल नामक फल प्रसाद के रूप में दिया। प्रसाद खाकर बाछल देवी गर्भवती हो गई और तदुपरांत भादो माह की नवमी को गोगाजी का जन्म हुआ। गुगल फल के नाम से इनका नाम गोगाजी पड़ा।

चौहान वंश में राजा पृथ्वीराज चौहान के बाद गोगाजी वीर और ख्याति प्राप्त राजा थे। गोगाजी का राज्य सतलुज सें हांसी (हरियाणा) तक था। गोगामेडी में गोगाजी का मंदिर एक ऊंचे टीले पर मस्जिदनुमा बना हुआ है, इसकी मीनारें मुस्लिम स्थापत्य कला का बोध कराती हैं। मुख्य द्वार पर बिस्मिला अंकित है। मंदिर के मध्य में गोगाजी का मजार है (कब्र) है। साम्प्रदायिक सद़भावना के प्रतीक गोगाजी के मंदिर का निर्माण बादशाह फिरोजशाह तुगलक ने कराया था। संवत 362 में फिरोजशाह तुगलक हिसार होते हुए सिंध प्रदेश को विजयी करने जाते समय गोगामेडी में ठहरे थे। रात के समय बादशाह तुगलक व उसकी सेना ने एक चमत्कारी दृश्य देखा कि मशालें लिए घोड़ों पर सेना आ रही है। तुगलक की सेना में हा-हाकार मच गया। तुगलक कि सेना के साथ आए धार्मिक विद्वानों ने बताया कि यहां कोई महान हस्ती आई हुई है। वो प्रकट होना चाहती है। फिरोज तुगलक ने लड़ाई के बाद आते गोगामेडी में मस्जिदनुमा मंदिर का निर्माण करवाया और पक्की मजार बन गई। तत्पश्चात मंदिर का जीर्णोद्वार बीकानेर के महाराज काल में 1887 व 1943 में करवाया गया।

गोगाजी का यह मंदिर आज हिंदू, मुस्लिम, सिख व ईसाईयों में समान रूप से श्रद्वा का केंद्र है। सभी धर्मो के भक्तगण यहां गोगा मजार के दर्शनों हेतु भादव मास में उमड़ पडते हैं। राजस्थान का यह गोगामेडी नाम का छोटा सा गांव भादव मास में एक नगर का रूप ले लेता है और लोगों का अथाह समुद्र बन जाता है। गोगा भक्त पीले वस्त्र धारण करके अनेक प्रदेशों से यहां आते हैं। सर्वाधिक संख्या उत्तर प्रदेश व बिहार के भक्तों की होती है। नर-नारियां व बच्चे पीले वस्त्र धारण करके विभिन्न साधनों से गोगामेडी पहुंचते हैं। स्थानीय भाषा में इन्हें पूरबिये कहते हैं। भक्तजन अपने-अपने निशान जिन्हे गोगाछड़ी भी कहते हैं लेकर मनौति मांगने नाचते-गाते ढप व डमरू बजाते व कुछ एक सांप लिए भी आते हैं। गोगा को सापों के देवता के रूप में भी माना जाता है। हर धर्म व वर्ग के लोग गोगाजी की छाया चढ़ाकर नृत्य की मुद्रा में सांकल खाते व पदयात्रा करते तथा गोरखनाथ टीले से लेटते हुए गोगाजी के समाधि स्थल तक पहुंचते हैं। नारियल, बताशे का प्रसाद चढ़ाकर मनौति मांगते र्हैं।

Bhaadra mass Krishna side is famous by the name of shaila navami navami. This day is celebrated as a Festival of great ecstasy of gogaji shrijahravir is from. On this occasion, the presiding deity of gogaji, Baba jahravir Taluka sarwabhaktagan in their homes by thadi (locationaltar) of akhand Bharat Jyoti are awakening and hear the Shaurya saga and birth gogadevji. Gogaji (Hindi: गोगाजी) (Rajasthani: गुग्गो), also known as Jahar Veer Gogga is … in Rajasthan has a Than (sacred place,generally a small temple) This practice is called re-awakening legend holdings of jahravir. The days seem so far removed the grand procession fair is somewhere. It is believed that complete all devotees shrigogadev manokamnaen.

Who were shrigogadev MaharajAccording to kivdanti shrigogadev bless gorkshanath Nath sect born Yogi was. Yogi gorkshanath has your mother had given as offerings to abhimantrit bachal guggal. Jahravir of the influence which the Queen bachal (shrigogadev Maharaj), purohitani majjuvir, mahtarani, Maid of the Narasimha Pandey from rainwater and from nilashvavir bandhya Mare was born. All these to protect the eternal religion heretic Kings from atrocious war which shrigogadevji and nilashva received the other except variegata. Finally guru gorkshanath yoga, chant and motivation including Earth blue horse by live shrijahravir gogaji took Samadhi.Medieval legends gogaji Hindu, Muslim, Sikh sects sympathetic and been cherished by the name of a secular lokdevta earning PIR as the presidio. Gogaji was born in Rajasthan dadreva (churu) wife of Rajput ruler of Chauhan vashan jaibar bachal pregnant Thu gorakshanath was the boon of bhado by shudi navami. At a distance of about 120 km from the city of Hanumangarh and two kilometres from the railway station of Gogamedi, the temple of Shri Gogaji There is also a bizarre story of birth. According to a kivdanti was the goddess mother of gogaji bachal childless. All of the progeny seek diligently after child found not happiness. Guru gorakshanath was doing penance on the mound of gogamedi. Were in their shelter and bachal goddess guru gorakshanath, the son received them Gave the blessing and that he will come to them on austerity completed dadreva offerings that will achieve them on to progeny. Penance is completed on gorakshanath bachal reached the Palace of the goddess. In those days the goddess sister of sagi kachal bachal goddess came to my sister was. Guru gorakshanath kachal Devi Prasad from Eclipse and two grain offerings were eating from ignorance. Kachal Devi got pregnant. When it turned out the bachal goddess re has been in the shelter of gorakshanath. Thu said, Goddess! My blessing will not empty you will be sure to achieve putraratn. Guru gorakshanath is called a miracle by Google as fruit offerings. Thereafter, the goddess got pregnant and other offerings bachal bhado month navami to gogaji was born. Google had its name from the name of the fruit gogaji.

Rajasthan Gogaji Fair gogamedi rajasthan gogaji temple Gogamedi is the famous for folk god “GOGAJI’s shrine in Hanumangarg district in Rajasthan.

Gogaji Chauhan King prithviraj Chauhan dynasty after the heroic and distinguished were King. State of gogaji Sutlej was by Hansi (Haryana) cm. On a high mound in the Temple of gogaji gogamedi masjidnuma remains, It provides realization of marinin are Muslim architecture. The main entrance is on bismila face. The temple is in the middle of gogaji’s Mazar (tomb) is. Creation of a communal symbol of gogaji sadbhavna Temple was made by ferozshah tughlak colossus. Sanvat 362 when firozshah tughlak in Hisar sind stayed in the State were to go to triumphant gogamedi. Night-time colossus tughlak and his army had a miraculous scene saw that coming on horses for Army minshall. Tughlak forces were in HA-Mach hacker. With that religious scholars tughlak pointed out that there are no great Celebrity has come. He wants to appear. The action by Firoz tughlak gogamedi orchestrated masjidnuma Temple and one in Mazar has become. Later the Temple in 1887 and reconditioning Bikaner chef was developed in 1943.
Temple of gogaji today Hindu, Muslim, Sikh and Christian Festival is the center of evenly shivered. All dharmo bhadav for shaila Mazar here of Taluka sarwabhaktagan views are treated in the mass padte. Gogamedi Rajasthan’s bhadav mass in a small village named City takes shape and becomes a bottomless ocean of people. Shaila devotee yellow robes come from several States by. The highest number of devotees of Uttar Pradesh and Bihar. Male children by yellow robes nariyan and various modes of access gogamedi. In the vernacular they purba says. May ask for accommodation in their own scars that Also called gogachdi sing dance-calling manauti with dhap and damru are also ticking and a few snakes. As the God of the shaila sapon are also considered. Shadows of gogaji every religion and class chadhakar dance do and the silicon account and was late with the gorakshanath mound padyatra gogaji are Samadhi of site access. Coconut, batashe for chadhakar manauti rhain offerings.

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16 Comments

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  1. DHAN DHAN BABA JAHAR VEER GOGGA JI KI JAI

  2. jai ho goga ji meharaj ki jai…..

  3. Jai Jai gogaji Maharaj Koti Koti Pranam Bachhal Nandan Dev Maharaj ke Charno ko . Mata Rani mehdi Wali , Maharaj narsingh Dev Ji Bhoju Dev Maharaj Yogi Dev Maharaj , Rattan Dev ji maharaj Bagad Dham Dadreva Nangari Dham Guru Gorakh Dham. har Ek Meri Sas me aapka hi naam aap mujhe Jaldi Ek bar Bulal Lo Maharaj G. Ye Sari Duniya maharaj sab Kuch Aap ka Hai . Aap Bahut Pyare Ho Bahut Bade Bhagwan Ho duniya Ke Rakhwale Ho. Jai Jai Maharaj Vishnu Dev Ji ki Jai JaiKar ho. Attar Singh and family
    New Delhi

  4. Koti Koti Charno Ko Pranam Maharaj Ji ki. Gogaji Mahdi Dham Ki.

  5. Jai jai Jai Gogaji Maharaj ki Jai Maa Maidi wali ki Jai Ho. Maa Vachhal Nandan Dev Maharaj Ki Jai Ho. Jai gogaji Maidai Dham Ki. Jai gogaji Maharaj Ki. Jai Baba Nar singh Pandey Ji Ki. Jai Bhajju Kotwal Dev Maharaj Ki Jai ho Rantana Vir Dev Ji Ki. Jai Jai Ho NarsinghDev Ji Maharajki. Sab Ki Baba paresaniDur Karo. Mere Malik. Jai guru Gorkah Nath Dev Baba Ji Ki. Jai Dadreva NagariDham Ki. Koti Koti Parnam. Baba Saidaiv Tere Higun Gata Rahu Malik. Jai Maidi Dham Malik Saidaiv HamSab Ki Raksha Karna saidaiv Appka Ashirwad Rahe Is Garib Parivar Par. Hum Tere Namm ko har ek Sans Me Rat Te Rahi. Jai Gogaji Maharaj Namah Shivai.

  6. Jai goga jhar peer ki Jai .bagad k peer ki jai

  7. Meri to jindegi hi baba ki hai jai baba jaharveer

  8. rajkumar dochaniya

    Jai gogaji Maharaj ki jai merit to Jindegi gogaji kai nam

  9. rajkumar dochaniya

    Gogaji Maharaj sab ki manokamna puri karo jai baba ki

  10. Bhai jai ho jaharveer goga g ki..,.bhai mera name sonu h..me utter pradesh k dictrict bijnor k ek kasve se hu.muje b goga g ko apni aap biti aatani h.

    .bhai kya aapko pta h jaaharveer g ki medi bala isthan ka adress,
    jha bagad m nomi ka bhut bda mela legega.
    Bhai… hmari help kigiye hm bhut dur se bol rahe h. Bhai aap to rajesthan hi rahte hoge.,bhai hmare msg ka reply jrur dena.mea apke msg ka wait …bhai plz muje adress bta digiye..mene ek msg snd kiya tha goga g ko sayd pahuch nhi paya..

    1. Dear Sonu
      …. Gogamedi rajasthan ke Hanumangarh Dist ke Nohar Teh me H… aap Hissar se Bhadra aa skte ho bhadra se 15 ke ki duri pr gogoaji ka temple h.

  11. plz goga ji ki samadhi or mazar na banaye unhone jivit samadhi li thi wo ek samadhi hai na ki mazar mazar wo hoti h marne k baad dafnaya jata hai plz goga ji ne jivit samadhi li thi aap se request hai ki mazar name ko hatake samadhi name de hamare desh me bahut se aise rishi muni huye h jinhone samadhi li hai jese bhagwan ram mata sita or bhi bahut h to plz mazar mat bolo

  12. Sahi kaha Goga ji maharaj ne jivit samadhi li thi. Majar marnoprant banai jati hai. Aur muslim logon mein hoti hai. Isliye ye majar shabd ko hata kar samadhi karein.

  13. Maine Delhi Rajasthan Gogamedi mandir darshan k liye Jana chahta hu so plz help me guys how can I go there bus, train or Volvo service??

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